रविवार, 8 अप्रैल 2018


नीतियां

नीतियां तब तक अनीतियां ही बनी रहती हैं , जब तक वे हमारे अहंकार और स्वार्थपूर्ति का साधन बनती हैं !
नीतियां तब सुनीतियां बनती हैं , जब वे सर्वस्व मंगल कामना का साधन बनती हैं !
याद रक्खो अंतिम विजय सर्वस्व मंगल इच्छा की ही होती है !

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