रविवार, 8 अप्रैल 2018

फूल की सुगंध


सिर फिरा माली 

एक माली, पेड़-पौधों के विकास के बारे में गहरा ज्ञान रखता था ,,, उसने बाग़ में  गुलाब के कुछ पौधे लगाये ,,,,,,,,,,,,,अत्यन्त ही समर्पण भाव से पौधों का पालन पोषण कुछ इस तरह किया कि उनमें अत्यन्त ही सुंदर, शानदार खुशबू वाले फूल आए , खुशबू दूर दूर तक फैली , राजाजी तक भी बात पहुँच गयी,,,,,,फूलों की खुशबू से राजा इतना प्रसन्न हुआ की उसने माली को अपनी सभा में सम्मानित किया , ईर्षालुओं को ये बात पसंद नहीं आयी ,,,,,,,,, रोज फूल तोड़ तोड़ कर ,अन्य अनेकों विधियों से माली को परेशान करने लगे ,,,,,,,परन्तु माली के समर्पण की पराकाष्ठा के आगे सभी ईर्षालू हार गए,,,,,,,,,अंत में दुष्टों ने माली को मार डाला ,,,,,,, राजा दुखी हुआ उसने बारी बारी अनेकों माली नियुक्त किए , लेकिन उनमें वैसा एक था ,,,,,,वो सारे माली भी विकृत मानसिकता वाले ही थे , फूल लगाने का कम तोड़ने का काम ज्यादा करते थे ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,उन शानदार सुगन्धित गुलाब के पौधों पर अब कांटे ही कांटे थे ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,, कांटेदार पौधों के पास जाने की हिम्मत किसी की भी नहीं होती थी,,,,,,,,,,,

बहुत दिनों बाद फिर एक माली ( वैसा ही सिरफिरा , अच्छे समर्पण भाव वाला) आया,,,,,,,,,,,,,,,,, बहुत धैर्य , परिश्रम और साहस-लगन से उसने फिर से बाग़ को महकाने का बीड़ा उठाया ,,,,,अब देखते हैं आगे क्या होता है ?    ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,भविष्य ही बतायेगा !

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